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फीचर आधुनिक युग की नवीन विधा है | यह विधा पत्रकारिता के क्षेत्र में हाल ही में विकसित हुई है | समाचार पत्रों के
चार प्रमुख अंग होते हैं - समाचार, लेख, फीचर तथा चित्र | फीचर एक विशेष आलेख होता है | अपनी विभिन्न
विशेषताओं के कारण यह अन्य तीन अंगों से सर्वथा भिन्न होता है | पत्रकारिता के क्षेत्र में फीचर-लेखन का एक विशेष
महत्व है | फीचर लेखन के स्तर से किसी समाचार पत्र या पत्रिका का स्तर निर्धारण होता है | फीचर के स्वरूप को
जानने के लिए इसके अर्थ को जानना आवश्यक होगा |
'फीचर' का शाब्दिक अर्थ है - रूपरेखा , आकृति, लक्षण या व्यक्तित्व | परंतु पत्रकारिता के क्षेत्र में फीचर का अर्थ
एक विशेष आलेख से है | पत्रकारिता में किसी घटना अथवा स्थिति का मनोरंजक ढंग से लिखा गया विवरण फीचर
कहलाता है | इसे दूरदर्शन के वृत्तचित्र के समान कह सकते हैं |
फीचर का अर्थ को जानने के लिए इसकी विभिन्न परिभाषाएं को जानना आवश्यक होगा --
मधुकर गंगाधर के अनुसार -“फीचर गद्य-काव्य की शैली में लिखी गई ऐसी रचना होती है जिसमें भाषा के
चुटीलेपन तथा विषय की विशिष्टता के कारण ऐसी सामग्री पाठक को मिल जाती है जिसे पढ़कर पाठक का
ज्ञानवर्धन और मनोरंजन होता है |”
विलियम एल रिवर्स के अनुसार -- “फीचर का जाल समाचार से बड़ा होता है |.....उसमें सूचना को उतना
महत्व नहीं दिया जाता जितना शैली, लालित्य और विनोद को |”
एल्मो स्कॉट के अनुसार -"फीचर किसी भावना के इर्द-गिर्द चक्कर काटता है | इसमें समाचार को ऐसा रूप
दिया जाता है कि वह और आकर्षक बने, पाठक का ध्यान खींचे और सामान्य पाठक की भावनाओं को छू
जाए |”
उपर्युक्त परिभाषाओं के आधार पर समसामयिक घटनाओं की भाव-प्रवण, मनोरंजक और संवेदनात्मक
प्रस्तुति को फीचर कहा जा सकता है | द्वूसरे शब्दों में किसी समाचार अथवा घटना का वर्णन जब कल्पना,
भावना तथा मनोरंजन के गुण के साथ किया जाता है तो वह फीचर कहलाता है |
फीचर के गुण / विशेषताएँ (+९€वॉपा€ (९ ठप /
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फीचर लेखन अपने आप में एक कला है | फीचर लेखक किसी घटना के तथ्यों का अति सुक्ष्मतापूर्वक अध्ययन व
चिंतन-मनन करके अपने अनुभव, अपनी प्रतिभा और कल्पना के संस्पर्श से उसे आकर्षक, रोचक एवं मनोरंजक
बनाता है |
प्रायः प्रश्न उठता है कि फीचर लिखते समय किन-किन बातों का ध्यान रखना चाहिए? इस प्रश्न के उत्तर को
जानने के लिए फीचर के गुणों व विशेषताओं को जानना आवश्यक है | फीचर के प्रमुख गुण या विशेषताएं
निम्नलिखित हैं --
(0) विषयवस्तु का समुचित ज्ञान
फीचर लेखन की प्रमुख विशेषता यह है कि लेखक को विषय-वस्तु का समुचित ज्ञान होना चाहिए | जिस घटना स्थान
आदि के विषय में लेखक फीचर लिखना चाहता है, उससे जुड़े सभी ठथ्यों का उसे भली प्रकार से अध्ययन व चिंतन
मनन करना चाहिए | उदाहरण के लिए यदि लेखक ताजमहल पर फीचर लिखना चाहता है तो उसे ताजमहल की
संरचना, उसके इतिहास तथा भूगोल के विषय में जानकारी होनी चाहिए | तथ्यों के अभाव में फीचर केवल कल्पित
कहानी बनकर रह जाता है|
(2) विश्वसनीयता
फीचर चाहे किसी विषय पर लिखा जाए, किसी घटना पर या फिर किसी स्थान पर लेकिन उसमें विश्वसनीयता का
होना नितांत आवश्यक है | समाचार में जहां केदल तथ्यों को प्रस्तुत किया जाता है वहीं फीचर लिखते समय कल्पना
और भावना का मिश्रण किया जाता है | लेकिन यदि कल्पना का प्रयोग अतिरंजित शैली में होगा तो फीचर अपनी
विश्वसनीयता को बैठेगा |
(3) संक्षिप्तता
संक्षिप्तता फीचर का एक आवश्यक गुण है | फीचर में किसी घटना का भावात्मक तरीके से वर्णन किया जाता है|
अत्यधिक तथ्यों और आंकड़ों के प्रयोग से फीचर नीरस बन जाता है | एक सफल फीचर लेखक थोड़े शब्दों में
अधिक बात कहता है | अतः फीचर लेखक के लिए संयमित भाषा में विषयदस्तु का रोचक एवं आकर्षक वर्णन करना
आवश्यक हो जाता है | अगर लेखक कल्पना और भावनाओं के आेग में बहकर विषय-वस्तु का विस्तारपूर्वक
विवेचन करने लगेगा तो संभवत: वह मूल कथ्य से भटक जाएगा | विस्तार से सरसता व भावात्मकता का हास हो
जाएगा|
७) मनोरंजकता
समाचार केवल तथ्यों पर आधारित होता है | उसमें सत्य का पक्ष अधिक प्रभावी होता है | जबकि फीचर लेखक
पाठक के मनोरंजन को ध्यान में रखता है | फीचर लेखक पाठक की रूचि-अभिरुचि का पूरा ध्यान रखता है | इसके
लिए फीचर लेखक कल्पना तथा भावात्मकता का सहारा लेता है | लेकिन ऐसा करते हुए भी फीचर लेखक सत्य और
तथ्यों को यधावत रखता है | वस्तुतः फीचर में तथ्यों की सरल, भावात्मक एवं मनोरंजक अभिव्यक्ति की जाती है|
(6) विचार श्रृंखला
फीचर में विचारों की तारतम्यता बनी रहनी चाहिए | यदि यह तारतम्य टूट जाता है तो फीचर में अभिव्यक्त किए गए
विचार पाठक पर अपना प्रभाव नहीं छोड़ पाएंगे और फीचर तथ्यों का संकलन, एक सामान्य लेख या समाचार
बनकर रह जाएगा |
(00) सरल, सरस एवं सुबोध भाषा
फीचर ज्ञानवर्धन तथा मनोरंजन के लिए लिखा जाता है | इसके अतिरिक्त फीचर किसी दर्ग-विशेष के लिए नहीं
अपितु जनसामान्य के लिए लिखा जाता है | फीचर की इन्हीं विशेषताओं को ध्यान में रखते हुए इसकी भाषा सरल,
सरस, सहज एवं बोधगम्य होनी चाहिए | फीचर लिखते समय लेखक को लोक-प्रचलित शब्दावली का प्रयोग करना
चाहिए ; भले ही वह शब्दावली तत्सम, तद्भव, देशज, विदेशज आदि कोई भी क्यों न हो | सरल एवं लघु वाक्यों का
प्रयोग करना चाहिए | लम्बे और जटिल वायों के प्रयोग से बचना चाहिए | भाषा आकर्षक हो परंतु जानबूझकर
आडंबरपूर्ण व भारी-भरकम शब्दों का प्रयोग नहीं करना चाहिए |
उपर्युक्त गुणों व विशेषताओं के कारण ही फीचर सदा से पाठकों के आकर्षण का केंद्र बना हुआ है | वह समाचार के
निकट की विधा होते हुए भी उससे सर्वथा भिन्न है | उसमें रोचकता, सरलता, सरसता, भावात्मकता, वैचारिकता आदि
ऐसे बहुत से गुण हैं जो उसे समाचार से अलग करते हैं|
